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योगावास जयपुर संपर्क Yogavaas Jaipur Sampark
आप योगावास जयपुर से संपर्क क्यों करें ?
योगावास जयपुर एक ऑनलाइन हॉलिस्टिक हीलिंग सेंटर है | योगावास में हमारी हीलिंग की उपचार पद्धति प्राचीन योग विज्ञान पर आधारित है | योग विज्ञान के अनुसार हमारे शरीर के पास स्वयं को स्वस्थ रखने और स्वयंका उपचार करने कि स्वाभाविक शक्ति है। योगावास में हम उपरोक्त वर्णित वक्तव्य को ही लोगों के अनुभव में लाने का प्रयास योगिक विधाओं के माध्यम से करते हैं |
- स्वयं के शारीरिक स्वास्थ्य एवं उपचार हेतु हम योगासन एवं योग आधारित पोषण आहार जैसे साधन उपलब्ध करवाते हैं।
- मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य और उपचार ज्ञान योग, ध्यान, मनोपरामर्श के द्वारा करते हैं।
योगावास में हम उपरोक्त वर्णित कार्यों का संपादन योगिक विवेक पर आधारित योगिक प्रोग्राम्स के माध्यम से करते हैं |
हमारे योगिक कार्यक्रमों की अधिक जानकारी के लिए यहां पर क्लिक करें योगावास वैलनेस प्रोग्राम्स :
- रोगों के निदान में सहायक योगा थेरेपी
- ऑनलाइन योग क्लासेस
- कैंसर में योग थेरेपी
- योगिक न्यूट्रिशन प्रोग्राम
- तनाव मुक्ति की योगिक तकनीक
- मेडिटेशन की लाइव ऑनलाइन क्लासेस
- योगा क्लास,सभी आयु वर्ग के लिए
- योगासन सीक्वेंस प्रोग्राम
- दिव्यांग व्यक्तियों के लिए योग
- कॉर्पोरेट योगा
- ग्रुप योगिक प्रोग्राम्स
हमारा योगावास के निर्माण का उद्देश्य क्या है ?
योगावास एक ऐसा प्रयास है जिससे प्रेरित हो आम जन भी थोड़ा सा समय निकाल कर, थोड़े से प्रयत्न से समग्र स्वास्थ्य का लाभ ले सकें। जैसा कि नाम से ही विदित है, योगावास का अर्थ हुआ, जहां योग का वास हो। यानी जहां योग बसता हो। तो सबसे पहले तो यह समझना आवश्यक है कि आखिर हमारे जीवन में योग का वास क्यों होना चाहिए। योग के अनुशासन में एक निरन्तरता है जिसके मूल में प्राचीन भारत के ऋषि मुनियों की जिज्ञासा और उसके अनुरूप किए गए गहन अध्ययन का समावेश है। इस गहन अध्ययन और ध्यान के अभ्यास के द्वारा ही हमारे ऋषि चैतन्यता को प्राप्त कर सके। इसी चेतन की स्थिति से ही उन्हें आनंदमय और अर्थपूर्ण जीवन के रहस्य की कुंजी प्राप्त हुई। योगावास का उद्देश्य भी यही है कि इस योग चेतना का संचरण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में हो और हम सभी, एक सार्थक, सम्पूर्ण, आनंदमय जीवन जी सकें। हमारा उद्देश्य है कि ज्ञान योग द्वारा हम लोगों के जीवन में भावनात्मक समन्वय और आध्यात्मिक उत्थान ला सकें।
योगावास में हमारा प्रयास यह भी है कि हम लोगों का साक्षात्कार उस योग से करवा सकें जिसका उल्लेख भगवान श्री कृष्ण ने भगवद गीता में किया है। भगवद गीता (2.50) में प्रभु श्री कृष्ण कहते हैं, “योगः कर्मसु कौशल” अर्थात कर्म में कौशल ही योग है। हमारी योग आधारित विभिन्न गतिविधियों में भी यही भाव अंतर्निहित है। हमारी इन योग कार्यक्रमों का यही उद्देश्य है कि व्यक्ति जीवन जीने का कौशलसीखे, और मन को नियंत्रित करना सीखे। योगावास के कार्यक्रम व्यक्ति को कार्यकुशल बनाते हैं।
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